Tu Kisi Rail Si (From "Masaan")

by Swanand Kirkire

12 Views Dec 13, 2025

Lyrics

तू किसी रेल सी गुज़रती है

तू किसी रेल सी गुज़रती हैमैं किसी पुल सा थरथराता हूँ

तू भले रति भर ना सुनती है
मैं तेरा नाम बुदबुदाता हूँ

किसी लंबे सफ़र की रातो में
तुझे अलाव सा जलाता हूँ

तू किसी रेल सी गुज़रती है
मैं किसी पुल सा थरथरा ता हूँ

काठ के ताले है
आँख पे डाले है
उनमें इशारों की चाबियाँ लगा

काठ के ताले है
आँख पे डाले है
उनमें इशारों की चाबियाँ लगा
रात जो बाक़ी हैं
शाम से ताकि हैं
नीयत में थोड़ी

नीयत में थोड़ी खराबिया लगा

मैं हूँ पानी के बुलबुले जैसा
तुझे सोचूँ तो फूट जाता हूँ

तू किसी रेल सी गुज़रती है
मैं किसी पुल सा थरथरा ता हूँ
तू किसी रेल सी गुज़रती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ
थरथराता हूँ, थरथाराता हूँ
थरथराता हूँ